खनिज नियमों को ताक पर रख चल रहे कटंगपाली के क्रेशर; हरिओम, ओम साईं और मां बंजारी मिनरल्स पर अवैध डोलोमाइट खपाने के आरोप,,,

Katangpali crushers are operating in defiance of mineral regulations; Hariom, Om Sai, and Maa Banjari Minerals are accused of illegally quarrying dolomite.


सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- जिला के सरिया क्षेत्र अंतर्गत कटंगपाली में संचालित डोलोमाइट क्रेशर प्लांट इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर अपनी जेबें भरने में जुटे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के हरिओम मिनरल्स, ओम साईं मिनरल्स और मां बंजारी क्रेशर के संचालकों द्वारा पर्यावरण और खनिज नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। आरोप है कि ये क्रेशर संचालक बिना किसी वैध अनुमति के, तय सरकारी दरों से बेहद कम दामों पर अवैध तरीके से डोलोमाइट पत्थर खरीद रहे हैं। शासन को बिना रॉयल्टी चुकाए सीधे अपनी जेबें गर्म की जा रही हैं, जिससे राज्य सरकार को हर महीने लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।

Katangpali crushers are operating in defiance of mineral regulations; Hariom, Om Sai, and Maa Banjari Minerals are accused of illegally quarrying dolomite.

वैध कम, अवैध खदानें ज्यादा: फल-फूल रहा है ‘काली कमाई’ का खेल :-
क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, कटंगपाली, साल्हे ओना, छैलफोरा, नवघट्टा और बिलाईगढ़ (अ) जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर डोलोमाइट का अवैध उत्खनन जारी है। क्षेत्र में वैध खदानों की तुलना में अवैध खदानों की संख्या कहीं अधिक हो चुकी है।
नियमतः क्रेशर संचालकों को शासन द्वारा निर्धारित शुल्क पर वैध खदानों से पत्थर खरीदना होता है और बकायदा रॉयल्टी पर्ची कटवानी होती है। लेकिन कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में इन क्रेशरों ने शॉर्टकट अपना लिया है। अवैध खदानों से आसानी से डोलोमाइट पत्थर क्रेशरों तक सप्लाई हो रहा है, जिसे कागजों पर वैध दिखाकर यह पूरा खेल खेला जा रहा है। सरिया और बरमकेला क्षेत्र में ऐसे कई और क्रेशर भी हैं, जो प्रशासन की नजरों से बचकर लगातार इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

न लेबर सुरक्षा, न ही कोई बीमा; भगवान भरोसे मजदूरों की जिंदगी :-
इन क्रेशर प्लांटों में केवल राजस्व की ही चोरी नहीं हो रही, बल्कि श्रम नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कुछ समय पूर्व ‘बाबा वैद्यनाथ क्रेशर प्लांट’ में हुआ विवाद इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
सुरक्षा के शून्य इंतजाम: क्रेशरों में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है।
इलाज व बीमे का अभाव: मजदूरों का न तो कोई बीमा कराया गया है और न ही कार्यस्थल पर कोई इमरजेंसी मेडिकल सुविधा है।
हादसे का डर: यदि कोई मजदूर हादसे का शिकार हो जाता है, तो सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान तक पर बन आती है। मजदूर यहां पूरी तरह से ‘भगवान भरोसे’ काम करने को मजबूर हैं।

प्रदूषण से बेहाल ग्रामीण और राहगीर; नियमों का नहीं हो रहा पालन :-
पर्यावरण नियमों की बात करें तो धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। नियमों के मुताबिक क्रेशर और भंडारण क्षेत्र के चारों तरफ सघन वृक्षारोपण, बाउंड्री वॉल और धूल दबाने के लिए नियमित पानी का छिड़काव अनिवार्य है, लेकिन यहाँ ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है।
बढ़ता संकट: क्रेशरों से उड़ने वाली डस्ट (धूल) नेशनल हाईवे से लेकर ग्रामीणों के घरों तक पहुंच रही है। इससे न केवल स्थानीय ग्रामीण बल्कि राहगीर भी भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों के मन में प्रदूषण जनित गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

निष्पक्ष जांच की मांग :-
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और खनिज विभाग द्वारा इन क्रेशरों और खदानों की गहराई से निष्पक्ष जांच की जाए, तो बहुत बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और इन रसूखदार क्रेशर संचालकों पर क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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