“नारी रक्षा सम्मान निधि योजना” के नाम पर कथित करोड़ों का खेल! हजारों महिलाओं के सामने ऋण की किस्त चुकाने का संकट,,,

A scam allegedly involving crores of rupees is being carried out under the guise of the “Nari Raksha Samman Nidhi Yojana”! Thousands of women are struggling to repay their loan installments.,,,

___साइबर फ्रॉड मामले में जेल में बंद आरोपी से जुड़ी योजना पर उठे सवाल, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आने की मांग,,,

🖊️🖊️🖊️“कलम का बादशाह“🖊️🖊️🖊️

सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- जिले में “नारी रक्षा सम्मान निधि योजना” के नाम पर संचालित एक कथित योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार होकर जेल पहुंच चुके मुख्य आरोपी से जुड़ी इस योजना के सामने आने के बाद हजारों महिलाओं की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। जिन महिलाओं को हर माह आर्थिक सहायता और बैंक ऋण की किश्त जमा कराने का भरोसा दिया गया था, आज वही महिलाएं माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की किस्तों के बोझ तले दब गई हैं।

A scam allegedly involving crores of rupees is being carried out under the guise of the “Nari Raksha Samman Nidhi Yojana”! Thousands of women are struggling to repay their loan installments.,,,

सपने दिखाए आत्मनिर्भरता के, अब किश्तों की चिंता में महिलाएं :-
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बताया गया कि “नारी रक्षा सम्मान निधि योजना” से जुड़ने पर उन्हें माइक्रो फाइनेंस संस्थानों से आसानी से ऋण मिलेगा। इतना ही नहीं, यह भी भरोसा दिलाया गया कि योजना संचालित करने वाला एनजीओ उनकी मासिक ऋण किस्त स्वयं जमा करेगा तथा प्रत्येक महिला को हर महीने 1,600 रूपए से 2,000 रूपए तक अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।
इन्हीं आश्वासनों पर विश्वास कर बड़ी संख्या में महिलाओं ने ऋण लिया और योजना में राशि जमा कर दी। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

जेल पहुंचा मुख्य आरोपी, महिलाओं पर टूटा आर्थिक संकट :-
योजना से जुड़ा मुख्य आरोपी वर्तमान में 2.71 करोड़ रुपए के संदिग्ध ट्रांजैक्शन एवं म्यूल अकाउंट साइबर फ्रॉड मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। आरोपी के जेल जाने के बाद योजना पूरी तरह ठप पड़ गई है।
अब माइक्रो फाइनेंस कंपनियां ऋण की मासिक किस्तों की वसूली सीधे महिलाओं से कर रही हैं। जिन महिलाओं को भरोसा था कि उनकी किश्तें एनजीओ जमा करेगा, वे अब स्वयं भुगतान करने को मजबूर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे में किश्त जमा नहीं कर पाने की स्थिति में उन पर अतिरिक्त ब्याज, पेनाल्टी तथा भविष्य में ऋण सुविधा बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।

गांव-गांव फैलाया गया था योजना का नेटवर्क :-
सूत्रों के अनुसार योजना का प्रचार-प्रसार व्यापक स्तर पर किया गया था। गांवों में बैठकों का आयोजन कर महिलाओं को योजना से जोड़ने का अभियान चलाया गया। महिलाओं को विश्वास दिलाया गया कि यह एक सामाजिक एवं महिला कल्याण से जुड़ी योजना है, जिससे उनका आर्थिक भविष्य सुरक्षित होगा।
इसी भरोसे के कारण हजारों महिलाओं ने बिना अधिक जांच-पड़ताल किए योजना पर विश्वास कर लिया।

माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल :-
मामले में अब माइक्रो फाइनेंस संस्थानों की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों के माध्यम से महिलाओं को इस योजना की जानकारी दी गई और उन्हें इससे जोड़ने में सहयोग किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सामने आते हैं कि किसी कर्मचारी या संस्था ने बिना पर्याप्त सत्यापन के महिलाओं को योजना से जोड़ने में भूमिका निभाई, तो उनकी जवाबदेही भी तय हो सकती है।
हालांकि, अभी तक किसी भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी या उसके कर्मचारी की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में जांच एजेंसियों द्वारा तथ्यों का परीक्षण किया जाना शेष है।

महिलाओं की मांग—सच्चाई सामने लाए प्रशासन :-
योजना से प्रभावित महिलाओं का कहना है कि उन्हें आर्थिक सहायता और ऋण मुक्ति का सपना दिखाया गया था, लेकिन अब वे कर्ज के बोझ तले दब गई हैं। महिलाओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा पीड़ित महिलाओं को राहत दिलाने की मांग की है।

कानूनी कार्रवाई की संभावना :-
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में महिलाओं से धन एकत्रित करने, झूठे आश्वासन देने अथवा वित्तीय अनियमितता के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन से उठ रही बड़ी मांग :-
स्थानीय लोगों और प्रभावित महिलाओं ने मांग की है कि :-
• पूरे मामले की आर्थिक जांच कराई जाए।
• योजना में जमा हुई राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
• प्रभावित महिलाओं को तत्काल राहत दी जाए।
• माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से समन्वय कर पीड़ित महिलाओं को किस्त भुगतान में राहत देने पर विचार किया जाए।
• यदि किसी संस्था या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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