भ्रष्टाचार का ‘हिमालय’: ग्राम पंचायत हिर्री में सरपंच-सचिव ने कागजों पर ही बसा दिया नया शहर, ज़मीन पर गरीब बेघर,,,

The Himalayas of corruption: In Hirri Gram Panchayat, the Sarpanch and Secretary have created a new city only on paper, leaving the poor homeless on the ground.,,,

___आवास प्लस 2.0 में हुआ इतना बड़ा ‘महा-घोटाला’ कि न्याय की उम्मीद भी कांप उठी; उप-सरपंच और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कलेक्टर के दफ्तर तक पहुंची चीख,,,

         🖊️🖊️🖊️“कलम का बादशाह”🖊️🖊️🖊️

सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- जनपद पंचायत सारंगढ़ की ग्राम पंचायत हिर्री में विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का ऐसा सुनामी आया है जिसने पूरे पंचायती राज ढांचे की ईंट से ईंट बजा दी है। सरपंच और सचिव की जुगलबंदी ने मिलकर शासन के खजाने और गरीबों के हक पर ‘डाका’ नहीं, बल्कि सीधे ‘परमाणु हमला’ कर दिया है! प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (आवास प्लस 2.0) के नाम पर हिर्री पंचायत में जालसाजी, धोखाधड़ी और मनमानी की ऐसी अंधेरगर्दी मची है, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।

The Himalayas of corruption: In Hirri Gram Panchayat, the Sarpanch and Secretary have created a new city only on paper, leaving the poor homeless on the ground.,,,

उप-सरपंच विपिका जोल्हे एवं दर्जनों ग्रामीणों ने जब कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सामने शिकायतों का पुलिंदा रखा, तो मानो शिकायतों का ‘पहाड़’ ही खड़ा हो गया। दस्तावेजों से साफ हो गया है कि हिर्री में सरपंच-सचिव का राज नहीं, बल्कि कानून की धज्जियां उड़ाने वाला ‘तानाशाही साम्राज्य’ चल रहा है।

कागजों पर महल, धरातल पर झोपड़ी: सरपंच-सचिव की ‘जादुई कलाकारी’ :-
हिर्री पंचायत के सरपंच और सचिव ने ऐसी ‘जादुई कलाकारी’ दिखाई है कि जिन गरीबों की छत से आसमान दिखता है, उन्हें कागजों में बड़े-बड़े महलों का मालिक बनाकर सूची से बेदखल कर दिया गया! वहीं दूसरी ओर, जिनके पास गाड़ियों का काफिला और पक्के मकान हैं, उन पर सरपंच-सचिव की ‘मेहरबानी का समंदर’ उमड़ पड़ा और उन्हें रेवड़ियों की तरह योजना का लाभ बांट दिया गया।
• ग्राम सभा का ‘नाटक’:- शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा तो केवल कागजों का ‘खिलौना’ बनकर रह गई है। असली खेल तो बंद कमरों में सरपंच और सचिव की साठगांठ से खेला गया, जहां निष्पक्षता और नियमों की बलि चढ़ा दी गई।
• सच्चाई पर पर्दा डालने की साजिश :- फर्जी उपस्थिति पंजी और फर्जी अनुमोदनों का ऐसा मायाजाल बुना गया है, जिसे देखकर खुद कानून भी अपना सिर पकड़ ले!

पसीने की बूंदों से बनी झोपड़ियां ढह रही हैं, पर जिम्मेदार अपनी जेबें भरने में मस्त :-
शिकायत पत्र के पन्ने-पन्ने से ग्रामीणों का आक्रोश ज्वालामुखी बनकर फूट रहा है। एक तरफ कड़कड़ाती धूप और मूसलाधार बारिश में असली गरीब और बेघर ग्रामीण अपनी टूटी-फूटी झोपड़ियों में तिल-तिल कर मरने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ जनता का खून-पसीना चूसकर सरपंच और सचिव अपनी मनमानी का जश्न मना रहे हैं। गरीबों के मुंह से निवाला छीनकर अपने चहेतों को परोसने का यह पाप अक्षम्य है!

कलेक्टर के सामने उठीं मांगें: ‘अब सिर्फ जांच का ढोंग नहीं, तबाही का महा-बुलडोजर चाहिए!’ :-
हिर्री के त्रस्त और आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्टर से ऐसी दंडात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी भ्रष्टाचार करने से कांप उठें :-
1. आवास सूची का ‘महा-सत्यापन’:- जिला स्तर की निष्पक्ष टीम से हिर्री के एक-एक घर की इंच-इंच जांच कराई जाए और सरपंच-सचिव द्वारा बनाए गए ‘फर्जी मायाजाल’ को ध्वस्त किया जाए।
2. अपात्रों की बेदखली :- गाड़ियों और पक्के मकान वाले अपात्रों को लात मारकर सूची से बाहर किया जाए और दर-दर भटक रहे असली गरीबों को तुरंत न्याय दिया जाए।
3. डिजिटल और मूल रिकॉर्ड की ‘अग्निपरीक्षा’ :- ऑनलाइन डेटा और सर्वेक्षण के मूल पन्नों की बारीक जांच हो, ताकि सरपंच-सचिव द्वारा की गई कोई भी हेराफेरी छुप न सके।
4. जेल की सलाखें और पद से बर्खास्तगी :- पदीय कर्तव्यों का कत्ल करने वाले सरपंच और सचिव पर सीधे एफआईआर दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए तथा शासकीय धन की कौड़ी-कौड़ी वसूली की जाए।

उप-सरपंच और ग्रामीणों का ऐलान :- ‘अब सीधे आर-पार का महा-संग्राम!’ :-
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन पत्र में उप-सरपंच (विपिका), मिलाप जोल्हे, सुशील जोल्हे, करन जोल्हे, किरीत कुमारी जोल्हे, सतीश जोल्हे, आदर्श रात्रे, ललिता समेत अनगिनत ग्रामीणों के दस्तखत और अंगूठे के निशान इस बात का सबूत हैं कि अब सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने सरपंच-सचिव के इस ‘घोटाले के पहाड़’ को ध्वस्त नहीं किया, तो पूरा हिर्री गांव सड़कों पर उतरकर ऐसा महा-आंदोलन खड़ा करेगा जिसकी गूंज राजधानी तक सुनाई देगी!

प्रशासन के पास दो ही रास्ते: न्याय या फिर जन-आक्रोश का बवंडर!:-
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन सरपंच और सचिव के इस संगठित ‘अधर्म’ पर कानून का चाबुक चलाता है या फिर कागजी खानापूर्ति करके इस मामले को ठंडे बस्ते में डालता है। हिर्री की जनता अब जवाब चाहती है—और यह जवाब दोषियों को सलाखों के पीछे देखकर ही पूरा होगा!

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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