‘Indecent act’ in review meeting; Barmkela Panchayat Secretary Purnachandra Sahu committed indecent act, ‘show cause’ notice issued,,,
सारंगढ़-बिलाईगढ़-बरमकेला :- जनपद पंचायत बरमकेला के ग्राम पंचायत बोरिदा और तोरा के सचिव पूर्णचंद साहू को जारी ‘कारण बताओ’ नोटिस ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर समीक्षा बैठक में सचिव ने ऐसा कौन सा ‘अशोभनीय कृत्य’ कर दिया, जिससे एसडीएम (SDM) साहिबा भड़क गई?
तहसीलदार कार्यालय सरिया से जारी इस नोटिस के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला? :-
बीते 10 जून 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आहूत की गई थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में जब शासकीय कार्यों और योजनाओं की समीक्षा चल रही थी, उसी दौरान सचिव पूर्णचंद साहू द्वारा कुछ ऐसा कृत्य किया गया जिसे प्रशासन ने ‘अशोभनीय’ माना है।
शासकीय गरिमा को ठेस :-
आधिकारिक पत्र (क्रमांक/885/तह./वा./2026) के मुताबिक, सचिव के इस व्यवहार पर बैठक की अध्यक्षता कर रहे अनुविभागीय अधिकारी (रा.) ने तत्काल गहरी नाराजगी व्यक्त की। प्रशासन का मानना है कि एक जिम्मेदार शासकीय सेवक का ऐसा व्यवहार कार्य के प्रति गंभीरहीनता और अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।
‘अशोभनीय’ शब्द पर गंभीरता: दो दिन में मांगा जवाब :-
नोटिस में ‘अशोभनीय कृत्य’ शब्द का प्रयोग सीधे तौर पर सचिव के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शासकीय सेवा नियमावली के तहत किसी भी लोक सेवक से बैठक के दौरान गरिमामय और अनुशासित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
प्रशासन ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सचिव पूर्णचंद साहू को सख्त निर्देश दिए हैं :-
समय सीमा:- नोटिस मिलने के 02 दिवस के भीतर।
प्रक्रिया :- सचिव को अधोहस्ताक्षरकर्ता (सक्षम अधिकारी) के समक्ष स्वयं उपस्थित होना होगा।
कार्रवाई की चेतावनी :- यदि समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, या स्पष्टीकरण संतोषप्रद नहीं पाया गया, तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उच्च कार्यालय को भेज दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं सचिव की होगी।
बड़ा सवाल: शासकीय बैठकों में मर्यादा की लक्ष्मण रेखा कौन तय करेगा? :-
यह मामला केवल एक सचिव को नोटिस मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। ‘अशोभनीय कृत्य’ जैसे कड़े शब्दों का सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज होना यह दर्शाता है कि अधिकारी अब बैठकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
अब देखना यह होगा कि :- सचिव पूर्णचंद साहू अपने बचाव में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और प्रशासन उनके जवाब से संतुष्ट होता है या उन पर गाज गिरना तय है।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️
✍️कलम का बादशाह✍️
