The millions of rupees in castings didn’t last even a year! The road in the Gobarsingha market complex was uprooted, reeking of corruption.,,
सारंगढ़-बिलाईगढ़-बरमकेला :- विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि का किस तरह बंदरबांट होता है, इसका ताजा उदाहरण ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में देखने को मिल रहा है। यहाँ साप्ताहिक बाजार परिसर में लाखों रुपये की लागत से कराई गई कंक्रीट सड़क (CC Road) की ढलाई एक वर्ष पूरा होने से पहले ही जगह-जगह से उखड़नी शुरू हो गई है। सड़क की इस बदहाली ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कागजों पर ‘चकाचक’, जमीन पर ‘खस्ताहाल’ :-
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, यदि निर्माण कार्य निर्धारित सरकारी मापदंडों और एस्टीमेट के अनुरूप हुआ होता, तो इतनी कम अवधि में सड़क की यह दुर्दशा नहीं होती। गिट्टी और सीमेंट का सही अनुपात न होने के कारण पहली कुछ बारिश और सामान्य आवागमन में ही सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है और कंक्रीट बिखरने लगा है।
अब मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि:-
* क्या बिना उचित गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन के ही निर्माण एजेंसी का फाइनल भुगतान कर दिया गया?
* तकनीकी सहायक और उप अभियंता ने सीट पर बैठकर ही इसकी रिपोर्ट तैयार कर दी?
“लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी अगर सालभर सड़क न चले, तो साफ है कि कमीशनखोरी के चक्कर में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।”
आक्रोशित ग्रामीण, गोबरसिंहा
जांच के दायरे में कनिष्ठ से लेकर वरिष्ठ अधिकारी :-
सड़क की खराब स्थिति सामने आने के बाद अब निर्माण एजेंसी के साथ-साथ तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कार्य पूर्ण होने का सर्टिफिकेट जारी करने से पहले किस अधिकारी ने इसका निरीक्षण किया था।
प्रशासन से ‘5 बड़े सवाल’ जिनका जवाब जनता चाहती है :-
01. निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच किस अधिकारी ने की थी?
02. कार्य पूर्ण होने से पहले किसके निरीक्षण और हरी झंडी पर इसे पास किया गया?
03. क्या बिना ग्राउंड वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) के ही ठेकेदार/एजेंसी को भुगतान कर दिया गया?
04. क्या इस महाघोटाले में शामिल तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदारों पर निष्पक्ष जांच होगी?
05. जनता के टैक्स के लाखों रुपये बर्बाद करने के लिए आखिर असली गुनहगार कौन है?
अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें :-
सड़क का उखड़ना सिर्फ एक निर्माण कार्य का खराब होना नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र की निगरानी व्यवस्था की विफलता को भी दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारी क्या सुध लेते हैं, या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
अब पूरी जनता की निगाहें प्रशासनिक जांच और दोषियों पर होने वाली दंडात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️
✍️कलम का बादशाह✍️
