भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ग्राम पंचायत सहजपाली? सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप, धारा 40(ग) के तहत दोबारा शिकायत,,,

Has the village panchayat of Sahajpali fallen prey to corruption? Serious allegations against the Sarpanch and Secretary, and a fresh complaint under Section 40(c) has been filed,,,


___रिश्तेदारों को ‘फर्जी वेंडर’ बनाकर सरकारी राशि डकारने का मामला; पहली जांच की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल,,,


सारंगढ़-बिलाईगढ़-बरमकेला :- जनपद पंचायत बरमकेला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सहजपाली एक बार फिर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के घेरे में है। पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर बंदरबांट और अपने ही परिजनों को अनुचित लाभ पहुँचाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40(ग) के तहत दूसरी बार शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और पिछली जांच की सत्यता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।

सरपंच पति को ‘फर्जी वेंडर’ बनाने का आरोप :-
मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत बरमकेला को सौंपे गए शिकायती आवेदन में वर्तमान सरपंच श्रीमती सत्या इजारदार और सचिव पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पंचायत निधि से होने वाले निर्माण कार्यों में नियमों को ताक पर रखकर सरपंच के परिजनों को लाभ पहुँचाया गया। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि सरपंच के पति को ही दस्तावेजों में “फर्जी वेंडर” दर्शाकर सरकारी राशि का भुगतान किया गया है।

कानूनी शिकंजे में पंचायत प्रतिनिधि :-
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि यह कृत्य पंचायती राज अधिनियम की धारा 40(ग) और धारा 92 का स्पष्ट उल्लंघन है। साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(d) के तहत भी यह मामला दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है, जहाँ एक लोक सेवक अपने पद का उपयोग स्वयं या अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए करता है।

पहली जांच पर ‘लीपापोती’ के आरोप :-
सहजपाली में यह दूसरी बार है जब समान प्रकृति की शिकायत दर्ज हुई है। स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय है कि यदि पहली शिकायत पर प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की होती, तो दूसरी बार इन आरोपों की नौबत ही नहीं आती। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पिछली जांच केवल एक ‘कागजी खानापूर्ति’ और औपचारिकता बनकर रह गई, जिसमें वास्तविक तथ्यों को दबाने का प्रयास किया गया।
“जांच टीम ने पिछली बार सतही कार्रवाई की। अब जब दोबारा शिकायत हुई है, तो यह स्पष्ट है कि प्रशासन के प्रति लोगों का भरोसा कम हो रहा है। आखिर किसके दबाव में जांच को ठंडे बस्ते में डाला गया?”

2020 से 2026 तक के रिकॉर्ड खंगालने की मांग :-
नई शिकायत में वर्ष 2020 से लेकर 2026 तक के कार्यकाल के दौरान हुए सभी कार्यों की गहन जांच की मांग की गई है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है :-
वेंडर सूची की सत्यता :- किन वेंडरों को भुगतान हुआ और उनका सरपंच से क्या संबंध है?
बिल-वाउचर का भौतिक सत्यापन :- क्या कागजों पर हुए कार्य धरातल पर मौजूद हैं?
राशि की वसूली :- नियम विरुद्ध लाभ लेने वालों से सरकारी धन की रिकवरी।
कठोर कार्रवाई :- दोषी पाए जाने पर सरपंच और सचिव की बर्खास्तगी।

प्रशासन की साख दांव पर :-
राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले की गूंज सुनाई दे रही है। लोगों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था ग्रामीण विकास के लिए है, न कि निजी तिजोरी भरने के लिए। अब पूरी क्षेत्र की निगाहें जनपद पंचायत बरमकेला के अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या इस बार जांच टीम निष्पक्षता दिखाएगी या फिर एक बार फिर ‘लीपापोती’ कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
फिलहाल, बरमकेला जनपद प्रशासन की ओर से इस पर ठोस प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन और उच्च अधिकारियों तक मामले को ले जाने की चेतावनी दी है।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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