Raigarh: Major corruption scandal erupts in Ektal Gram Panchayat; former Sarpanch and Secretary accused of embezzling ₹16 lakh,,,
छत्तीसगढ़-रायगढ़ :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत पुसौर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत एकताल में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। पूर्व सरपंच और सचिव पर मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग करने और अपने परिजनों को अनुचित लाभ पहुँचाने के संगीन आरोप लगे हैं। इस संबंध में अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) रायगढ़ को एक औपचारिक शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?:-
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत एकताल की पूर्व सरपंच श्रीमती बुद्धेश्वरी चौहान और तत्कालीन पंचायत सचिव ने अपने कार्यकाल (2020-2025) के दौरान शासकीय योजनाओं और पंचायत निधि में भारी अनियमितता बरती है। आरोप है कि सरपंच ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पति हिमांशु चौहान को ‘फर्जी वेंडर’ के रूप में दर्शाया और पंचायत के विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान उनके व्यक्तिगत खाते में करा दिया।
आंकड़ों में गबन की कहानी :-
शिकायत पत्र में दिए गए विवरण के अनुसार, भ्रष्टाचार का यह खेल सुनियोजित तरीके से खेला गया:
वेंडर का नाम:- हिमांशु चौहान (सरपंच के पति)
बिलों की संख्या:- लगभग 23 बिल
कुल आहरित राशि:- लगभग ₹16,23,900 (सोलह लाख तेईस हजार नौ सौ रुपये)
आरोप है कि यह राशि नियम विरुद्ध तरीके से निकाली गई है, जो सीधे तौर पर पंचायती राज अधिनियम की गरिमा के खिलाफ है।
कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन :-
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि सरपंच और सचिव का यह कृत्य निम्नलिखित धाराओं के तहत दंडनीय है:
1. पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 92 :- इसके तहत शासकीय राशि के दुरुपयोग पर वसूली की कार्रवाई का प्रावधान है।
2. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1)(d) :- एक लोक सेवक द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर स्वयं या अपने रिश्तेदारों को आर्थिक लाभ पहुँचाना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
जांच और कठोर कार्यवाही की मांग :-
शिकायत में मांग की गई है कि वर्ष 2020 से 2025 तक के पूरे कार्यकाल के दौरान हुए सभी विकास कार्यों, भुगतान रिकॉर्ड, वेंडर सूची और बिल-वाउचरों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
“यह सार्वजनिक धन की खुली लूट है। सरपंच ने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर अपने सगे-संबंधियों को लाभ पहुँचाया है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राशि की वसूली करे और दोषियों को जेल भेजे।”
आगे क्या?:-
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले में त्वरित संज्ञान लेगा। यदि जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो पुसौर जनपद के अन्य पंचायतों में भी इस तरह के ‘वेंडर घोटाले’ की परतें खुल सकती हैं।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️
✍️कलम का बादशाह✍️
