The issue of illegal occupation in Gram Panchayat Gobarsingha deepens, independent journalist threatened with death.,,,
सारंगढ़-बिलाईगढ़-बरमकेला :- ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय निवासी और स्वतंत्र पत्रकार अजय साहू द्वारा तहसील कार्यालय में की गई शिकायत के बाद प्रशासन ने संज्ञान तो लिया, परंतु उसके बाद की घटनाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
शिकायत पर प्रशासन की कार्रवाई :-
मामला तब सामने आया जब अजय साहू ने तहसीलदार को लिखित शिकायत देकर जानकारी दी कि ग्राम पंचायत गोबरसिंहा की शासकीय भूमि पर लक्ष्मीनारायण पटेल द्वारा अवैध कब्जा कर मकान, गोदाम और शासकीय दुग्ध सहकारी समिति का निर्माण कर लिया गया है। इस शिकायत पर गंभीरता दिखाते हुए तहसीलदार ने मौके का मुआयना किया और यह पाया कि विवादित भूमि वाकई शासकीय है। इसके बाद तहसीलदार ने 17 सितंबर 2025 को साफ निर्देश दिए कि अवैध रूप से कब्जा की गई इस शासकीय भूमि को 2-3 दिनों के भीतर खाली करना होगा।
धमकी और अभद्र व्यवहार :-
लेकिन, जैसे ही तहसीलदार मौके से लौटे, स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि लक्ष्मीनारायण पटेल ने शिकायतकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार अजय साहू के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दे डाली। चिल्लाते हुए लक्ष्मीनारायण ने स्पष्ट कहा कि वह भूमि नहीं छोड़ेगा और यदि कोई जोर जबरदस्ती करेगा तो गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। इस धमकी से गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया और अजय साहू ने अपनी जान की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
अवैध कब्जा और शासकीय संपत्ति का दुरुपयोग :-
ग्राम पंचायत स्तर पर शासकीय भूमि का कब्जा कर उस पर निजी निर्माण कार्य करना किसी भी दृष्टि से वैध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि लक्ष्मीनारायण पटेल द्वारा बनाई गई संरचनाओं में गोदाम और दुग्ध सहकारी समिति भी शामिल है, जो सीधे-सीधे शासकीय जमीन पर निर्मित हैं। ऐसे निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन हैं बल्कि शासन की योजनाओं और ग्राम पंचायत की संपत्ति पर सीधा डाका डालने जैसा है।
प्रशासन के लिए चुनौती :-
इस मामले ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर तहसीलदार द्वारा कब्जा हटाने का आदेश दिया गया है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता को धमकी मिलने से अब यह केवल भूमि विवाद का विषय नहीं रह गया है, बल्कि कानून-व्यवस्था से भी जुड़ गया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में ऐसे अवैध कब्जे बढ़ते रहेंगे और आमजन को न्याय नहीं मिल पाएगा।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया :-
ग्राम पंचायत गोबरसिंहा के कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन लोग डर और दबाव के कारण खुलकर बोल नहीं पाते। अजय साहू द्वारा शिकायत और स्वतंत्र पत्रकार होने के नाते इस मुद्दे को उठाने के बाद अब गांव में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करे तो गांव की स्थिति सुधर सकती है।
कानून का उल्लंघन और संभावित धाराएं :-
भूमि राजस्व संहिता और शासकीय भूमि से संबंधित प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति शासकीय भूमि पर निजी निर्माण नहीं कर सकता। ऐसा करने पर प्रशासन कब्जा हटाने के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कर सकता है। वहीं स्वतंत्र पत्रकार और शिकायतकर्ता अजय साहू को दी गई धमकी भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) के अंतर्गत आती है, जिस पर पुलिस कार्रवाई भी अनिवार्य है।
शिकायतकर्ता की सुरक्षा पर सवाल :-
अजय साहू का कहना है कि उन्होंने पूरी निष्ठा और साहस के साथ शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जे के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन अब उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। स्वतंत्र पत्रकार होने के नाते वे केवल अपनी ही नहीं बल्कि समाज के हित की बात कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग की है ताकि दबाव और धमकियों के बावजूद सच सामने आ सके।
आगे की राह :-
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले को किस तरह सुलझाता है। क्या केवल कब्जा हटाने तक ही कार्रवाई सीमित रहेगी, या फिर धमकी और अवैध कब्जे पर कठोर कानूनी कार्रवाई भी होगी? ग्रामीणों की उम्मीदें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।
निष्कर्ष :-
ग्राम पंचायत गोबरसिंहा का यह मामला केवल एक व्यक्ति द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था और शिकायतकर्ता की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। यदि इस पर त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह एक खतरनाक मिसाल बन सकता है, जहां कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति शासकीय संपत्ति पर कब्जा कर ले और शिकायत करने वालों को दबाने के लिए धमकी का सहारा ले। अब ज़िम्मेदारी प्रशासन की है कि वह न केवल शासकीय भूमि को मुक्त कराए बल्कि शिकायतकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार अजय साहू की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को भी सुनिश्चित करे।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️
✍️कलम का बादशाह✍️
