सारंगढ़ टाइम्स विवाद पर पत्रकारों में उबाल“हरिजन” शब्द के प्रयोग से भड़का पत्रकार समाज – थाना प्रभारी को सौंपा आवेदन, कार्रवाई की माँग तेज,,,

Journalists are furious over the Sarangarh Times controversy.
The use of the word “Harijan” infuriated the journalist community, and they submitted an application to the police station in-charge, demanding action.,,,

सारंगढ़–बिलाईगढ़ :- स्थानीय समाचार पत्र सारंगढ़ टाइम्स में प्रकाशित एक खबर ने जिले के पत्रकार समाज में भूचाल ला दिया है। खबर में अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अपमानजनक शब्द “हरिजन” के प्रयोग पर पत्रकारों ने तीखा विरोध जताया है। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को जिले के वरिष्ठ एवं सक्रिय पत्रकारों ने सिटी कोतवाली सारंगढ़ पहुँचकर थाना प्रभारी को आवेदन सौंपा।

Journalists are furious over the Sarangarh Times controversy.
The use of the word “Harijan” infuriated the journalist community, and they submitted an application to the police station in-charge, demanding action.,,,

पत्रकारों ने आवेदन में स्पष्ट कहा है कि :-  “हरिजन” शब्द संविधान की भावना के खिलाफ है। यह शब्द न केवल अनुसूचित जाति समुदाय का अपमान करता है बल्कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(r) एवं 3(1)(s) के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।

पत्रकारों ने कहा कि :- जिस मीडिया का दायित्व समाज को दिशा देने का है, वही अगर असंवेदनशील शब्दों का प्रयोग करेगा, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को ठेस पहुँचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार दिया है, और इस तरह के शब्द न केवल समाज में भेदभाव फैलाते हैं बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी चोट पहुँचाते हैं।
पत्रकारों ने कहा – यह अभिव्यक्ति की नहीं, सम्मान की लड़ाई है

पत्रकारों ने बताया कि :- यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि समानता और सम्मान की लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि जिस “हरिजन” शब्द को कभी महात्मा गांधी ने भावनात्मक रूप में प्रयोग किया था, उसी शब्द का दुरुपयोग आज अपमानजनक रूप में किया जा रहा है। इसलिए अब समय आ गया है कि मीडिया अपनी भाषा में संवेदनशीलता लाए और समाज के हर वर्ग के सम्मान को सर्वोच्च स्थान दे।

पत्रकारों ने मांग की कि :- इस मामले में संपादक और प्रकाशक के खिलाफ तत्काल जांच की जाए। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो पत्रकार समाज सामूहिक रूप से जिला मुख्यालय में आंदोलन करेगा।
पत्रकारों की एकजुटता बनी मिसाल

इस आवेदन पर जिले के वरिष्ठ पत्रकार नरेश चौहान जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति, किशोर मनहर, राहुल भारती, युवराज निराला योगेश कुर्रे, देव जाटवर, गौतम कुमार, गुलशन लहरे, रोशन वर्मा, समीप अनंत, पिंगध्वज खांडेकर,सुकराम खूंटे सहित कई पत्रकारों ने हस्ताक्षर कर एक स्वर में विरोध दर्ज कराया है।
पत्रकारों का कहना है कि :- “मीडिया की कलम जनता की आवाज़ है, न कि किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का माध्यम।”

पत्रकारों की दो टूक :-  “अगर कोई भी संस्था या व्यक्ति जातिगत अपमान को समाचार के नाम पर प्रचारित करेगा, तो हम उसका विरोध करते रहेंगे। संविधान से बड़ा कोई नहीं — और सम्मान से बड़ी कोई खबर नहीं।”

थाना प्रभारी का जवाब :-

थाना प्रभारी सिटी कोतवाली सारंगढ़ ने आवेदन प्राप्त कर कहा कि :-  मामला गंभीर है और इस पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जाँच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पत्रकारों की आवाज़ गरजी, सम्मान की लड़ाई शुरू!

यह मामला सिर्फ एक शब्द के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की गरिमा और पत्रकारिता की सच्ची जिम्मेदारी के पक्ष में उठी आवाज़ है। सारंगढ़ के पत्रकारों ने साबित किया है कि कलम अगर सत्य के साथ खड़ी हो, तो अन्याय चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, झुकना तय है।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️भ्रष्ट्राचारियों को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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