
सारंगढ की वारे क्लिनिक का बहुचर्चित मामला हाईप्रोफाइल हुआ जिसमें अधिकारी सस्पेंड हुए जिससे स्वास्थ्य विभाग की जांच भी हुआ तो पता चला कि बिहार की मुजफ्फरपुर के विवि में बना हुआ पाया जहां जांच में खगेश्वर प्रसाद वारे की BAMS की डिग्री फर्जी बनाना पाया गया जिसकी जिम्मेदार खगेश्वर प्रसाद वारे को पाया गया । जिसके बाद से लगभग उनके ऊपर जांच की बिंदु मंडरा रही थी इसी तारतम्य में यूनानी पद्दति विभाग द्वारा उनका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया जिससे खगेश्वर प्रसाद वारे ने लगभग लाखो रुपये लोन लेकर हॉस्पिटल का भवन बनाया गया जिसमे अपनी पुरी जानकारी छिपाकर शासन को लाखों रुपये की चपत लगाया गया।
*बिना परमिशन के बिना रजिस्ट्रेशन के फर्जी क्लीनिक के बाहर हॉस्पिटल का नाम लिखकर लोगो को कर रहे है गुमराह
राज्य शासन के स्वास्थ्य विभागीय अधिकारियों ने खगेश्वर प्रसाद की सर्टिफिकेट को निरस्त करने के बाद लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया फिर भी इलाज धड़ल्ले जारी है यही नही अब फर्जी क्लीनिक साबित होने के बाद लोगो को कर रहे है भ्रमित बाहर में वारे हॉस्पिटल के नाम से बैनर बनाकर चिपकाया गया है जबकि सही रहता तो उसमें रजिस्ट्रेशन नम्बर भी लिखा होना चाहिए था लेकिन ऐसा नही लिखा क्योंकि रजिस्ट्रेशन हुआ ही नही तो चस्पा भी कैसे करेगा बता दे आपको की फर्जी क्लीनिक अब फर्जी हॉस्पिटल इसमें धोखाधड़ी का अपराध कायमी तो बनता है क्योंकि खगेश्वर प्रसाद वारे कोई विजय माल्या या नीरव मोदी तो नही जो भगोड़े दिवाल्या होगया लेकिन उससे कई गुनाह ज्यादा फ़र्जरी व्यक्ति है जो शासन से अपनी जानकारी छिपाकर लोन भी लिया और लोगो के साथ लोगो के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है ।
नेताओ का संरक्षण के आगे अधिकारियों और शासन की नियम हो रही विफल क्यो?*

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खगेश्वर प्रसाद वारे की जब हॉस्पिटल का उदघाटन हुआ तब सारंगढ स्थानीय विधायक भी आया था अब विधायक को भी कहा पता कि इनकी सर्टिफिकेट निरस्त होने बाद लाइसेंस भी निरस्त हो चुका है बताए भला निमंत्रण में कौन नही जाता लेकिन खगेश्वर प्रसाद वारे को लगा कि विधायक और कुछ जन प्रतिनिधि आशीर्वाद रूपी संरक्षण प्राप्त है लेकिन खगेश्वर वारे की ये गलत मानशिकता रही इसमें ‘कलम के बादशाह’ पोर्टल ने मुखाग्रता के साथ सच्चाई लिखी जिसमे अधिकारी भी कार्यवाही करने को डर रहे है अब डर क्यो अधिकारी को अधिकारी बेबस क्यो नीचे पढ़ेंगे।
खगेश्वर प्रसाद वारे की गुंडागर्दी अपने पंचायत में भी उजागर देखे

ग्राम पंचायत में जब सरकारी जमीन और सरकारी शौचालय और मूत्रालय बन रहा था तो खगेश्वर प्रसाद वारे ने पंचायत सहित कब्जे धारी बैष्णव परिवार को भी धमकी दिया और पंचायत को भी जिसकी प्रमुखता से उजागर हुए पेपर कटिंग आप पढ़ने के बाद समझ सकते है।
जब सर्टिफिकेट निरस्त लाइसेंस निरस्त तो किसके दम पर लिखा दिया हॉस्पिटल का नाम
जब राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सर्टिफिकेट रद्द कर दिए यूनानी पध्दति ने लाइसेंस रद्द कर दिया तो किसके बल बुते और दम पर बाहर लिखा दिया वारे हॉस्पिटल ऐसा क्यों क्या अधिकारियों का सह प्राप्त है या अपनी ताकत की सह से जैसे पंचायत को डरा धमका दिया उसके तर्ज पर लिखवा दिया नाम ऐसे अगर होता रहेगा तो सरकारी हॉस्पिटल का कोई महत्व नही रह जाएगा।
ऐसे फर्जीधारी डॉक्टर के वजह से लोगो की जा रही जान ऐसे कब तक होता रहेगा
सरकार ने सरकारी हॉस्पिटल पंचायतो में तहसीलों में स्थापित किया गया है कि आम जन मानस और बीमार लोगो को ज्यादा परेशानी व ज्यादा समस्या न हो करके नजदीक में हॉस्पिटल सन्चालित किया गया है लेकिन ऐसे फर्जीधारी हॉस्पिटल क्लीनिक को बंद नही कराया तो लोगो की जान जाते रहेगी।
खगेश्वर प्रसाद वारे को अधिकार नही क्लीनिक या हॉस्पिटल सन्चालित करने का अधिकार फिर भी कर रहे है सन्चालित क्यो?
खगेश्वर प्रसाद वारे की सभी रास्ता सरकार ने बंद कर रखी है जिस तारतम्य में इनकी तो पहले BAMS की सर्टिफिकेट निरस्त करते हुए जांच जारी रखा है उसके बाद इनकी लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया जिसमें इनके ऊपर विभागीय जांच की नजर घेरे में ले रखी है फिर भी खगेश्वर प्रसाद वारे द्वारा हिर्री में सन्चालित कर रखी है ऐसे अगर सन्चालित होता रहे तो लोगो की जान जाते रहेगा।
झोलाछाप ने खोल रखा अब हॉस्पिटल कब होगी कारवाही जवाब देने वाला अधिकारी बना मुखबघिर पढ़े

छत्तीसगढ़ के शासन स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. बाबा ने कहा है कि झोलाछाप और बिना डिग्री के क्लीनिक सन्चालित करने वाले के ऊपर दण्डनात्मक कार्यवाही के साथ विभिन्न धाराओं के साथ अपराध कायम होगा तो क्या झोलाछाप डॉक्टर खगेश्वर प्रसाद वारे के द्वारा हॉस्पिटल खोलने की पुष्टि स्वयं कर बाहर में बारे हॉस्पिटल नामक बैनर लगाकर लोगो को भ्रमित कर रहे है ऐसे में जान जाएगी मरीजो की उसकी जवाबदेही क्या खगेश्वर प्रसाद वारे लेगा?
अगर लाइसेंस है सर्टिफिकेट है तो बाहर में चस्पा करने की नियम से क्यो है बाहर आधिकारिक पुष्टि के बाद भी मनोबल इतना बढ़ गया कि खबर छापने वाले पत्रकारो को झूठी मामलों में फसाने की साजिश तक कि कूटरचित प्लानिक कर रहे है ऐसे में झोलाछाप डॉक्टरों की मान्यता बढ़ता हुआ जा रहा है। ऐसे होते गया तो सरकारी हॉस्पिटलों को बंद कर देना चाहिए सरकार को ध्यान देना चाहिए कि निजी हॉस्पिटल को चलाने की नियम तो दे रहे है विभाग लेकिन फर्जी हॉस्पिटल को क्यो दे रहे है बढ़ावा क्या विभाग की भी है साँठगाँठ।
अवैध क्लीनिक और अवैध हॉस्पिटल की पुष्टि की स्वयं स्वास्थ्य विभाग की प्रपत्र ने
फर्जीवाड़े वारे क्लीनिक की नाम बदलकर वारे हॉस्पिटल किया गया जिसमें दर्जनों से अधिक कार्यरत हैं वर्कर जिसमें लड़कियों और कुछ लड़के के फोटो भी आपको देखने को मिलेगा जिसमें हम ने फोटो की अपलोड जिसमें लड़कियों के ड्रेस दिख रहा हॉस्पिटल के नर्स के रूप में इसकी पुष्टि स्वयं खगेश्वर प्रसाद वारेने 15 अगस्त की फोटो में कि अपलोड अगर उनकी क्लीनिक या हॉस्पिटल मे कार्यरत अगर नहीं है कार्यरत तो नर्स की ड्रेस में क्यो, और ड्रेस कोट के साथ हॉस्पिटल के अंदर क्यों है मौजूद?
क्या पैसों के आगे सरकारी विभाग भी है मजबूर? या खगेश्वर की गुंडागर्दी से डर रहे स्वास्थ्य विभाग की टीम खबर प्रकाशित होने के बाद देखते है क्या कुछ लेंगे एक्शन
भ्रष्ट्राचारियो को,,,,
जब तक तोड़ेंगे नही, तब तक छोड़ेंगे नही
कलम का बादशाह✍️
