प्रसूता को अस्पताल पहुंचाना संभव नहीं था डायल 112 के वाहन में जवानों एवं मितानिन ने मिलकर कराया प्रसूता का प्रसव,,,,

It was not possible to take the pregnant woman to the hospital, the soldiers and Mitanin together got the delivery done in the vehicle of Dial 112.


सारंगढ़-बिलाईगढ़:- सारंगढ़ वनांचल क्षेत्र जहां स्वास्थ्य अमला नहीं पहुंच पाता वहां डायल 112 के जवान देवदूत बनकर पहुंच जाते हैं। ताजा मामला जिले के वनांचल क्षेत्र साहसपानी-केड़ार का है। जहां ग्राम पंचायत सहसपानी में एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। डायल 112 को इसकी सूचना मिली और वह मौके पर पहुंच गए। महिला के साथ उसके परिजन भी थे, लेकिन अस्पताल पहुंच पाने का टाइम नहीं था। जिससे डायल 112 के जवानों और मितानिन, परिजन ने निर्णय लिया कि वाहन रास्ते में ही रोक कर वह प्रसव कराएंगे। मामला ठीक ठाक रहा, प्रसूता ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है।

It was not possible to take the pregnant woman to the hospital, the soldiers and Mitanin together got the delivery done in the vehicle of Dial 112.


ऐसे मिला प्रसूता रीना सूर्यवंशी को जीवनदान :-
सेंट्रलाइज कमांड एंड कंट्रोल सेंटर रायपुर से मेडिकल इमरजेंसी की सूचना मिली। जहां सारंगढ़ 112 की टीम तत्काल रवाना होक बताए पते पर ग्राम-सहसपानी पहुंची। जहां देखा कि एक महिला जिसका नाम रीना सूर्यवंशी, पति मंगल उम्र 26 वर्ष है। वह प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। जिसके बाद प्रसूता को वाहन में बैठाकर वह अस्पताल के लिए रवाना हुए, घर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी चंदई पहुंचे थे कि अचानक महिला की प्रसव पीड़ा अत्याधिक बढ़ गयी।


वाहन में ही कराया सुरक्षित प्रसुता का प्रसव :-
इसी दौरान स्थिति की भांपते हुए मितानिन एवं परिजन ने जवानों को बताया गया कि इस स्थिति में प्रसूता को हॉस्पिटल तक ले जाना संभव नहीं है।आरक्षक विनोद चंद्रा -1145  और वाहन चालक तिरुपति निषाद ने निर्णय लिया कि अब वाहन में ही महिला का प्रसव कराएंगे। वाहन को सुरक्षित जगह देखकर खड़ा किया गया,उक्त गर्भवती महिला को  ERV 112 वाहन में ही प्रसव कराया गया। प्रसूता ने जहां एक स्वस्थ नवजात शिशु को जन्म दिया।


प्रसव के पश्चात सुरक्षित पहुंचाया गया अस्पताल :-
प्रसव हो जाने बाद टीम द्वारा जच्चा बच्चा दोनों को प्राथमिक उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र सारंगढ़ में भर्ती कराया गया। बेहतर इलाज के लिए यहां पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। डॉक्टर द्वारा जच्चा बच्चा दोनों को स्वस्थ होना बताया गया है।


नाज़ुक समय में आरक्षक एवं वाहन चालक ने लिया सही निर्णय:-
पहला मामला नहीं है जब 112 के जवान किसी जरूरतमंद के पास देवदूत बनकर पहुंचे. जिले में लगातार ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं। जब एंबुलेंस या चिकित्सकीय सुविधाएं समय पर नहीं मिल पाती और आपातकाल में डायल 112 के जवान लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं। मौजूदा मामले में भी डायल 112 के जवानों और मितानिन ने नाजुक समय में सही निर्णय लिया गया। जिससे गांव की महिला और उसके नवजात को नया जीवन मिला है।

भ्रष्ट्राचारियो को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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