सारंगढ।। रायगढ़ जिला के बहुचर्चित मामला वारे क्लीनिक की हाईप्रोफाइल माजरा किसी से छिपा नही जहां अधिकारियों की निलंबित होने तक का कारवाही बहुत गरमाया था। उसी क्लिनिक का सर्टिफिके राज्य सरकार ने रद्द कर दिया था। अब वही 8 फरवरी 2022 को समक्ष चिकित्सको द्वारा अभिकथनो को बोर्ड फरवरी में बैठक रखा गया था जिसमे सर्वसहमति से निर्णय लेकर फर्जी डिग्रीधारी चिकित्सको का पंजीयन निरस्त किया जावे की कारवाही किया गया है। रजिस्ट्रार डॉक्टर संजय शुक्ला ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्दति एवं प्राकृतिक बोर्ड रायपुर ने कुछ ऐसे आवेदकों ने पंजीयन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया है। जिन्होंने अन्य राज्यो के विश्वविद्यालयों से डिग्रियां प्राप्त की है ऐसे आवेदकों डिग्रियां की जांच विश्वविद्यालयो से कराई गई जहाँ से यह सूचना प्राप्त हुई कि आवेदकों की मार्गशीट और डिग्रियां फर्जी है इन आवेदकों का पंजीयन नही किया है। इसके फलस्वरूप वारे क्लीनिक की संचालन बंद कर वारे हॉस्पिटल संचालित किया जहां रहा है जहां खगेश्वर वारे द्वारा संचालित किया जा रहा है। जिला चिकित्सा अधिकारी केशरी ने बताया कि उनके कोई रिश्तेदार के नाम पर करवा रहा है लेकिन अभी तक नही हुआ है रजिस्ट्रेशन ,बाकी इलाज कर रहा है तो उनके ऊपर कानूनी कार्यवाही होगा । वही बता दे आपको की खगेश्वर प्रसाद वारे की पहले तो BAMS की डिग्री रद्द किया गया उसके बाद उनका पंजीयन समाप्त किया गया दस्तावेज तो रद्द कर दिया गया
लेकिन खगेश्वर प्रसाद वारे के ऊपर कारवाही करना भूली प्रशासन आखिर कब करेगा कारवाही क्या अधिकारी संवैधानिक नियम को भूल गए?
आखिर कब तक फर्जी लाइसेंस, फर्जी डिग्री के माध्यम से धोखा देते रहेंगे आखिर कब तक ऐसे ही प्रशासन अपनी लचर रवैय्या पेश करते रहेंगे और ऐसे ही मुन्ना भाई घूमते रहेंगे?
BAMS की फर्जी डिग्री लाइसेंस से लिया लाखो रुपये लोन कब होगा वसूली
सारंगढ के ग्राम हिर्री में वारे क्लीनिक संचालनकर्ता खगेश्वर प्रसाद वारे की फर्जी डिग्री लाइसेंस सब को विभाग द्वारा रद्द कर वैधानिक कारवाही करना भूल गए लेकिन लाखो रुपये की लोन लेकर बैंक से उसी लाइसेंस से लिया गया होगा? जिसकी बारीकी से जांच कर दण्डनात्मक कारवाही के साथ वसूली की कारवाही होनी चाहिये।
लाखो रुपये के लोन फर्जी दस्तावेज में लेना क्या उचित है? विभाग को तत्काल संज्ञान लेकर कारवाही करनी चाहिये ऐसे मुन्ना भाई को सलाखों के पीछे भेजने में कोई प्रश्नचिन्ह नही होगा। वही बता दे कि विभाग को तत्काल उनके हॉस्पिटल में लगे बैनर को हटा कर तत्काल कारवाही होनी चाहिए ये हम नही कहते बल्कि संवैधानिक नियम कहती है। कोई फर्जी दस्तावेज बनाकर अगर सरकार की योजनाओं को या फ़र्जरी कर कोई लाभ लेते है तो उनके ऊपर कारवाही नही किया तो ऐसे मुन्ना भाईयों के मनोबल बढ़ता जाएगा इसमें कारवाही करना सही प्रतीत होता है।
तहसीलदार, इंचार्ज थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित किया था तो क्या वर्षो से सरकार को फर्जी लाइसेंस और फर्जी दस्तावेज बनाकर फर्जीधारी के रूप में सामने आया तो उनके ऊपर कारवाही कब?
बता दे कि वारे क्लीनिक हिर्री में तहसीलदार और इंचार्ज थाना प्रभारी की टीम जाकर 3 लाख की मांग किया गया करके शिकायत हुआ जिसमें जांच करने उपरांत दोनों को निलंबित किया गया था। तो जो वर्षो से सरकार की नियमो को दरकिनार कर फर्जी लाइसेंस फर्जी डिग्री प्रमाण पत्र बनवाकर सरकार को धोखा देना अपनी प्रमाण छिपाना और सरकार से लाखों की लौंन उसी लाइसेंस के माध्यम से लेना कही भी सत्य नही है। इस ओर भी विभाग को ध्यान देनेयोग्य है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में बने आवास को ले लिया हॉस्पिटल के दायरे में क्या?
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला कि दो-तीन आवास का लाभ मिला था जिसकी भवन को हॉस्पिटल के दायरे में बनवा कर कार्य मे ले रहे है अगर ऐसा नही है तो इसकी सूक्ष्मता से जांच किया जाएगा कि कहा बना है भवन को किधर स्थापित किया है,बना है तो हॉस्पिटल के अंदर क्यो बना है इसमें ही सभी सवालों की जवाब अपने आप बाहर आ जायेगा।
क्या कहा जिला चिकित्सा अधिकारी-केशरी
उसको मना किया गया है,अगर सन्चालित किया जा रहा होगा उनके द्वारा तो ये तो फर्जी है गैर कानूनी है उनको अधिकार नही है सन्चालित करने का जांच करवा रहा हु अगर ऐसा कुछ है तो, उनके ऊपर कानूनी कार्यवाही किया जाएगा।
“फर्जीवाड़ों को जब तक तोड़ेंगे नही तब तक छोड़ेंगे नही”
