1 जनवरी 2025 “शौर्य दिवस”सन 1818 को इसी दिन केवल “500 महार सैनिकों ने 28000 पेशवाई फ़ौज” को धूल चटाई थी,,,,,

1 January 2025 “Shaurya Diwas” On this day in 1818, only “500 Mahar soldiers defeated 28000 Peshwai army”.

सन 1818 को इसी दिन केवल “500 महार सैनिकों ने 28000 पेशवाई फ़ौज” को हराकर भारत को ‘जातिमुक्त’ और ‘लोकतांत्रिक’ बनाने की दिशा में पहला ऐतिहासिक क़दम बढ़ाया था।

भारतवर्ष :- 1 जनवरी, “शौर्य_दिवस“ये वही दिन है जिसको बाबा साहब ने शौर्ये दिवस घोषित किया और #कोरेगांव शौर्ये मेमोरियल पर हर साल जाते थे पेशवा बाजीराव-II के 28000 सैनिक थे। मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा ब्राह्मण की शक्तिशाली फौज को हरा दिया। सैनिको को उनकी वीरता और साहस के लिए सम्मानित किया गया। ये पेशवा वही थे जिनके राज्ये में भारतवासी/मूलनिवासी अछूत बना दिए गए थे और इनकी गले में हांड़ी और कमर में झाड़ू बाँध के चलने का सख्त आदेश था, इनकी परछाई तक अछूत मानी जाती थी इसलिए इनको सिर्फ दोपहर को ही निकलने की आज़ादी थी जब परछाई छोटी होती है

___‘भीमा कोरेगांव’ जहां लिखा गया BAHUJAN शौर्य का गौरवशाली इतिहास :-

“वो सिर्फ 500 थे, लेकिन दिल में जज़्बा था कि जातिवाद को हराना है.. वे जान पर खेल गए, कई तो कट मरे, पर आख़िरकार… #भीमा_कोरेगांव के मैदान से पेशवा ब्राह्मण की फ़ौज भाग गई। 1818 को इसी दिन महार सैनिकों ने पेशवाई को हराकर भारत को जातिमुक्त और लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में पहला ऐतिहासिक क़दम बढ़ाया”  दलितों के शौर्य की उस कहानी को कहती है जो आज से लगभग दो सौ साल पहले घटित हुई थी। वह साल 1818 था जब आज के ही दिन यानि 1 जनवरी 1818 को पूरी दुनिया भर में दलित समाज के शौर्य की गाथा लिखी गई थी।

यह घटना जहां दलितों की शौर्यगाथा है तो वहीं मनुवादियों के मुंह पर कालिख। इस महान गाथा में 500 नायकों ने हिस्सा लिया था। ये लोग बहुजन समाज के नायक हैं। इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर हरसाल 1 जनवरी को उस महान स्थान पर जाकर उन वीर दलितों का नमन किया करते थे।

___‘भीमा कोरेगांव’ जहां लिखा गया BAHUJAN शौर्य दिवस :-

1 जनवरी 1818 को कोरेगांव के युद्ध में महार सैनिकों ने ब्राह्मणवादी पेशवाओं को धूल चटा दी थी। बाबासाहेब ने अपनी किताब राइटिंग्स एंड स्पीचेस (अंग्रेज़ी) के खंड 12 में ‘द अनटचेबल्स एंड द पेक्स ब्रिटेनिका’ में इस तथ्य का वर्णन किया है। यह कोरेगांव की लड़ाई थी, जिसके माध्यम से अंग्रेजों ने #मराठा_साम्राज्य को ध्वस्त कर भारत में ब्रिटिश राज स्थापित किया। यहां 500 महार सैनिकों ने पेशवा राव के 28 हजार सैनिकों की फौज को हराकर देश से पेशवाई का अंत किया। कोरेगांव भीमा नदी के तट पर महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित है। 01 जनवरी 1818 को सर्द मौसम में एक ओर कुल 28 हजार सैनिक जिनमें 20000 हजार घुड़सवार और 8000 पैदल सैनिक थे, जिनकी अगुवाई पेशवा बाजीराव-II कर रहे थे तो दूसरी ओर बॉम्बे नेटिव लाइट इन्फेंट्री के 500 महार सैनिक, जिसमें महज 250 घुड़सवार सैनिक ही थे। आप सोच सकते हैं कि सिर्फ 500 महार सैनिकों ने किस जज्बे से लड़ाई की होगी कि उन्होंने 28 हजार पेशवाओं को धूल चटा दिया।

दूसरे शब्दों में कहें तो एक ओर ब्राह्मण राज बचाने की फिराक में पेशवा थे तो दूसरी ओर पेशवाओं के पशुवत अत्याचारों से बदला चुकाने की फिराक में गुस्से से तमतमाए महार। आखिरकार इस घमासान युद्ध में पेशवा की शर्मनाक पराजय हुई। 500 लड़ाकों की छोटी सी सेना ने हजारों सैनिकों के साथ 12 घंटे तक वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी। भेदभाव से पीड़ित अछूतों की इस युद्ध के प्रति दृढ़ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महार रेजिमेंट के ज्यादातर सिपाही बिना पेट भर खाने और पानी के लड़ाई के पहले की रात 43 किलोमीटर पैदल चलकर युद्ध स्थल तक पहुंचे। यह वीरता की मिसाल है। इस युद्ध में मारे गए सैनिकों को #श्रद्धांजलि देने के लिए एक #चौकोर_मीनार बनाया गया है, जिसे कोरेगांव_स्तंभ के नाम से जाना जाता है। यह महार रेजिमेंट के साहस का प्रतीक है। इस मीनार पर उन शहीदों के नाम खुदे हुए हैं, जो इस लड़ाई में मारे गए थे। 1851 में इन्हें मेडल देकर सम्मानित किया गया।

भ्रष्ट्राचारियो को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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