सरगुजा :-सरगुजा के जंगलों का उद्योगपति अडाणी के लिए कोल ब्लॉक आवंटन के लिए सफाया हो रहा है। आदिवासी लगातार तीन-चार वर्षों से जंगल कटने से रोकने के लिए आन्दोलनरत हैं। अडाणी ने हरे-भरे जंगलों को काटना शुरु भी कर दिया है। आदिवासियों की कोई सुनने को तैयार नहीं है। सरगुजा संभाग भारतीय संविधान के तहत पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है। कांग्रेस, भाजपा की सरकारों ने आजादी के बाद से लेकर आज तक पांचवीं अनुसूची का केवल उल्लंघन करने का काम किया है। जबकि पांचवीं अनुसूची का पालन होगा, तभी ये पृथ्वी बचेगी। ये हरियाली बचेगी। प्रकृति बचेगी। प्रकृति बचेगी तब जाके हमें कोदो, कुटकी, मंडिया, कोलियारी भाजी, चापड़ा चटनी खाने को मिलेगी। जब प्रकृति का अंधाधुंध दोहन होगा तो ये सभी चीजें विलुप्त होने में कोई देर नहीं लगेगी। आज जिस तरह से मैदानी इलाकों में ये सब चीजें देखने को नहीं मिलतीं, वैसे ही ट्रायबल क्षेत्रों में भी ये सभी कंद-मूल केवल संग्रहालय में ही देखने को मिलेंगे।
आजकल छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल बस्तर के गांवों में जा रहे हैं। बस्तर के जंगलों में पाए जाने वाले कंद, मूल और भाजी, मंडिया पेज और चापड़ा चटनी खाते हुए खूब फोटो सेशन हो रहा है। भूपेश बघेल जब मुख्यमंत्री बने थे तब ऐसा लगा था कि छत्तीसगढ़ के किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है, अब जरूर कुछ न कुछ बदलाव होगा। ये तो कम से कम दूसरे नेताओं की तरह दिखावटीपन वाला काम नहीं करेंगे। धरातल पर कुछ कार्य करके दिखायेंगे।

आदिवासियों ने भी इनको बंफर वोट देकर एकतरफा कांग्रेस पार्टी के विधायक जिताने का काम किये। आदिवासियों ने भी सोचा था कि कम से कम ये तो सामंतवादी सोच नहीं रखेंगे और हम आदिवासियों को हर स्तर पर न्याय दिलायेंगे। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस पार्टी के बाकी नेताओं ने आदिवासियों का केवल उपयोग किया वैसे ही अपने आपको किसान का बेटा कहने वाले भूपेश बघेल जी ने भी किया। इनके तीन वर्ष के शासनकाल में बस्तर और सरगुजा के आदिवासियों का कुछ भी भला नहीं हुआ। बस्तर के सिलगेर में इनकी पुलिस ने आदिवासियों पर गोली चलाने का काम किया। आज भी उन आदिवासियों को न्याय नहीं मिला है। बस्तर और सरगुजा के कीमती खनिजों का दोहन बदस्तूर जारी है। बड़े बड़े कार्पोरेट्स और पूंजीपति बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की , किसी की भी सरकार में उनकी पूंजी दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। आदिवासी आज भी अपनी किस्मत बदलने का इंतजार कर रहा है।

जिस तरह से कांग्रेस के पूर्व के बड़े नेता बस्तर में आकर आदिवासियों के साथ सिर में गौर सिंग का मुकुट लगाकर ढोल नाचकर उनको बेवकूफ बनाते थे। उनके साथ लांदा, महुआ, सल्फी और मंडिया पेज पीकर उनके शुभचिन्तक होने का ढोंग करते थे, आज वही रणनीति भूपेश बघेल जी अपना रहे हैं। आखिर कांग्रेसी रंग में रंगा हुआ व्यक्ति वही करेगा जो उनके बड़े नेता उनको सिखाते हैं। पहले तो आदिवासियों के खान-पान के बारे में टिप्पणी करके उनको पिछड़ा, असभ्य, जंगली बताओ और जब उनके वोट लेने की बारी हो तो उनके साथ खाने का ढोंग करके उनके वोटों को लूटने का काम करो। ये कांग्रेस और बीजेपी जैसी पूंजीवादी पार्टियों का बरसों पुराना स्टाईल रहा है। उसके बावजूद भी हमारा आदिवासी समाज इतना भोला-भाला है कि हमारे मुख्यमंत्री आ रहे हैं करके पलक फावड़े बिछाकर उनका सम्मान कर रहा है। ऐसा समाज पूरी दुनिया में खोजने पर भी नहीं मिलेगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी। इस तरह से भोले भाले समाज की भावनाओं का शोषण मत करो। इनको इनका संवैधानिक अधिकार दिलवाने का काम करो। ये लोग इस धरती के असली मालिक हैं। इनकी जल-जंगल-जमीन को छीनने का काम मत करो। इनकी महानता को देखिए। आप इनकी पीठ पर कोड़े बरसा रहे हो और ये आपको स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर भी खिला रहा है।
आप छत्तीसगढ़ के किसान का बेटा होने का फर्ज निभाओ। छत्तीसगढ़ की धरती ऐसी धरती है जहाँ पर पूरी दुनिया का पेट पालने लायक संसाधन भरा पड़ा है। उन संसाधनों को मुट्ठी भर पूंजीपतियों के हवाले करना बंद करो।
एक आदिवासी
✍️ हेमन्त पोयाम प्रदेश अध्यक्ष बसपा छ. ग. के फेसबुक वाल से साभार
भ्रष्ट्राचारियो को,,,,
जब तक तोड़ेंगे नही, तब तक छोड़ेंगे नही
कलम का बादशाह✍️
