11 सूत्रीय मांगों को लेकर बहुजन समाज पार्टी,सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला इकाई के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,,,,,

Memorandum submitted by Bahujan Samaj Party, Sarangarh-Bilaigarh district unit to the District Collector in the name of President Madam regarding 11 point demands.

सारंगढ़-बिलाईगढ़ :– दिनाँक 31/10/2022 को बहुजन समाज पार्टी जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ इकाई के द्वारा छत्तीसगढ राज्य में अनुसूचित जनजातियों को उनकी जनसंख्यात्मक 32% आरक्षण/प्रतिनिधित्व देने के विषय में महामहिम राष्ट्रपति महोदया भारत सरकार नई दिल्ली के नाम जिला कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को बसपा सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह मल्होत्रा के नेतृत्व में सैकड़ों बसपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ ज्ञापन सौंपा गया है जो इस प्रकार है
कि दिनांक 19 सितम्बर 2022 को बिलासपुर हाईकोर्ट  के द्वारा छत्तीसगढ प्रदेश में 58% आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए एक फैसला सुनाया, जिससे राज्य में निवासरत 32% अनुसूचित जनजाति समाज को आबादी के अनुपात में 12% का सीधे-सीधे नुकसान हो रहा है। वैसे भी छत्तीसगढ राज्य निर्माण के 12 वर्षों बाद 2012 से अनुसूचित जनजाति को 32% आरक्षण देने की शुरुआत हुई थी। इस तरह से इन  वर्गों का 12 वर्षों तक लगातार 12% का नुकसान हुआ है। छत्तीसगढ राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में मजबूती से इस मुद्दे पर अपना पक्ष नहीं रखने की वजह से ही यह फैसला आया है।    

                         Sarangarh-Biligadh: – On 31/10/2022 by Bahujan Samaj Party District Sarangarh-Biligadh unit, in the name of giving their population of 32% reservation to the Scheduled Tribes in the state of Chhattisgarh, the District Collector of the Government of India, New Delhi, the District President of the District A memorandum has been submitted along with hundreds of BSP office bearers and workers, which is as follows that on 19 September 2022, the Bilaspur High Court gave a decision by declaring 58% reservation in Chhattisgarh state as unconstitutional, causing a direct loss of 12% in proportion to the population of 32% scheduled tribe society residing in the state. Anyway, after 12 years of Chhattisgarh state construction, 32% reservation was started to the scheduled tribes from 2012. In this way, these classes have lost 12% continuously for 12 years. This decision has come due to the Chhattisgarh state government not firmly present its case in the High Court.

  बहुजन समाज पार्टी छत्तीसगढ निम्नलिखित बिन्दुओं पर आपका ध्यानाकर्षण कराना चाहती है-
01. छत्तीसगढ राज्य में सरकार अनुसूचित जनजातियों का 32% आरक्षण/प्रतिनिधित्व को यथावत रखने की घोषणा करे तथा तत्काल उसे लागू करे।
02. छत्तीसगढ राज्य शासन विधानमंडल में 32% अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व व्यवस्था को लागू करने का प्रस्ताव पारित कर राज्य गजट में प्रकाशित करे।
03. छत्तीसगढ राज्य शासन भारत के उच्चतम न्यायालय में अनुसूचित जनजातियों को उनका 32% प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए हलफनामा दाखिल करे।


04. छत्तीसगढ़ शासन भारतीय संविधान के मुताबिक अनुच्छेद 16(4) लोकनियोजन के विषय मे अवसर की समता प्रदान करें।। उदाहरण – तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र राज्य की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राज्य में भी 50% की सीमा से ऊपर आरक्षण लागू किया जा सकता है अतः छत्तीसगढ़ राज्य में भी अनुसूचित जाति को 16%, अनुसूचित जनजाति को 32% तथा अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण उनके जनसंख्या के हिसाब से दिया जाये।। और यह सब छत्तीसगढ़ सरकार की नीयत पर निर्भर हैं।।
05. छत्तीसगढ राज्य में अनुसूचित जनजातियों के लिए 32% आरक्षण नियम को लागू कर संविधान की 9 वीं अनुसूची में सूचीबद्ध किया जाये।
06. छत्तीसगढ एक गरीब राज्य है। यहां से लाखों लोग रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं। इसलिए हमारी पार्टी की यह मांग है कि छत्तीसगढियों को शासकीय सेवाओं में कुल पद का 93% प्रतिनिधित्व दिया जाय, शेष 7% अन्य को दिया जाय।


07. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 46 स्पष्ट रूप से कहता है कि- “राज्य” अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य दुर्बल वर्गों की शिक्षा एवं अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा तथा अन्य सभी प्रकार के शोषण से उनकी रक्षा करेगा।
छत्तीसगढ शासन अनुसूचित जनजातियों के विश्वस्तरीय उच्चतम शिक्षा हेतु विश्वविद्यालय की स्थापना करे तथा अर्थ संबंधी हितों के लिए संविधान की 5 वीं अनुसूची का पूर्णत: पालन कराये।
08.छत्तीसगढ शासन पूंजीपतियों अडाणी,अंबानी,जिन्दल,एस्सार,टाटा,बिड़ला एवं अन्य बाहरी उद्योगपतियों को समता बनाम आन्ध्रप्रदेश सरकार के विरुद्ध निर्णय के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र का शासकीय या निजी जमीन उद्योग स्थापना हेतु देना बंद करे तथा अब तक दी गई जमीन को उनके वारिसों को वापिस करे।
09. छत्तीसगढ शासन उद्योग नीति में बदलाव करके अनुसूचित जनजातियों को व्यवसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित युवा/युवतियों की टीम को सहकारी समिति के माध्यम से पंजीकृत करे तथा दीर्घकालीन ऋण एवं उपयोग हेतु सरकारी जमीन मुहैया कराए।


10. छत्तीसगढ शासन अनुसूचित क्षेत्रों से समस्त प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों के उत्खनन पर अनुसूचित जनजातियों को 50% शेयर होल्डर धारक घोषित करे।
11. केन्द्र एवं राज्य शासन की पूंजीवादी नीतियों के कारण गौतम अडाणी को व्यक्तिगत तौर पर 02 लाख करोड़ रुपये राष्ट्रीयकृत बैंक से ऋण उपलब्ध करवाया है। इसी तरह अनुसूचित जनजातियों के अर्थ संबंधी हितों के लिए संविधान के अनुच्छेद 46 को लागू करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार से 50-50% की भागीदारी से छ.ग. के पूरे 78 लाख आदिवासियों के लिए 02 लाख करोड़ की सामूहिक ऋण की मांग करते हैं। सरकार सतत् विकास के लिए ऋण अनुसूचित जनजातियों को तत्काल प्रदान करे।


    अत: भारत के प्रथम आदिवासी महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी से उपरोक्त 11 बिन्दुओं का मांग पत्र का ज्ञापन सौंपते हुए पूर्ण आशा एवं विश्वास करते हैं कि बहुजन समाज पार्टी द्वारा मांगा गया यह संवैधानिक मांग पत्र को सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आजादी के बाद 75 वर्षों तक हो रहे अन्याय का पटाक्षेप हो सके तथा अधिकारों से वंचित समाज को उनका हक-हिस्सा मिले,यही लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है।
अंत में बहुजन समाज पार्टी यही उम्मीद करती है कि अनुसूचित जनजातियों के हित में उपरोक्त मांगें पूर्ण होंगी।
इसी आशा एवं विश्वास के साथ यह मांग-पत्र, ज्ञापन दिया गया है।

भ्रष्ट्राचारियो को,,,
✍️जब तक तोड़ेंगे नहीं 📝तब तक छोड़ेंगे नहीं✍️

✍️कलम का बादशाह✍️

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